Posted by : सुशील कुमार Friday, September 26, 2014


विता शब्दों से नहीं रची जाती
भ्यांतर के उत्ताल तरंगों को उतारता है कवि 
कागज के कैनवस पर 

एक शब्द-विराम के साथ /

कविता प्रतिलिपि होती है उसके समय का 
जो साक्षी बनती है शब्दों के साथ उसके संघर्ष का 
जिसमें लीन होकर कवि जीता है अपना सारा जीवन
बिन कुछ कहे,
और जीने को अर्थ देता है /

जब कविताएँ कान और हृदय से नहीं,
पेट और दिमाग से सुनी जाती हो 
शब्द कवि के लिए प्रतीक-चिन्ह नहीं - 
एक प्रश्न-चिन्ह बन कर रह जाता है
 उसके जीवन का 


{ 4 comments... कृपया उन्हें पढें या टिप्पणी देंcomment }

  1. असली कविता वह है, जिसे हम महसूस करते हैं, पर शब्दों में बाँध नहीं पाते
    शब्दों की बूंदें तो बस कहने को कविता है

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  2. शब्द केवल माध्यम हैं अहसासों की अभिव्यक्ति का कविता में, लेकिन केवल शब्द कविता नहीं हैं...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. आपने सही कहा कैलाश बाबू !

    ReplyDelete

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